📌 प्रसूति अवकाश (मातृत्व अवकाश) से सम्बन्धित नियम -
(1) प्रसूति अवकाश की अवधि अवकाश के प्रारम्भ के दिनांक से 180 दिन तक हो सकती है परन्तु ऐसा अवकाश सम्पूर्ण सेवा के दौरान तीन बार से अधिक स्वीकृत नहीं किया जाएगा ।
(2) यदि किसी शिक्षिका के दो या अधिक जीवित बच्चे हो तो उसे प्रसूति अवकाश स्वीकृत नहीं किया जायेगा । फिर भी यदि शिक्षिका के दो जीवित बच्चों में से कोई भी बच्चा जन्म से किसी असाध्य रोग से पीड़ित हो या विकलांग या अपंग हो या बाद में किसी असाध्य रोग से ग्रस्त हो जाय या विकलांग या अपंग हो जाय तो उसे अपवाद के रुप में, एक बच्चा और पैदा होने तक *प्रसूति अवकाश स्वीकृत किया जा सकता बशर्ते उसने तीन से अधिक प्रसूति / मातृत्व अवकाश न लिये गये हों ।
*विशेष :- 2 वर्ष से कम अंतराल पर भी दूसरे बच्चे पर मिलेगा 180 दिन का मातृत्व अवकाश : खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
गर्भपात सम्बन्धी नियम :- गर्भपात के मामलों में, जिसके अन्तर्गत गर्भस्राव भी है, प्रसूति अवकाश की अवधि शिक्षिका के जीवित बच्चों की संख्या का ध्यान दिये बिना प्रत्येक अवसर पर कुल छः सप्ताह (42 दिन) तक हो सकती है, बशर्ते कि अवकाश के आवेदन पत्र के साथ प्राधिकृत चिकित्सक का प्रमाण पत्र हो ।
छुट्टी के आवेदन हेतु आवश्यक दस्तावेज -
१. प्रार्थनापत्र -
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3 Comments
क्या मातृत्व अवकाश यदि एक बार ले लिया गया हो और कि ई कारण वश उसे पूरा किए बिना पुनः कार्य भार ग्रहण करना पड़े तो शेष बचा अवकाश दुबारा देय नहीं होगा
ReplyDeleteक्या मेडिकल अवकाश के बाद सीधे बिना ज्वाइन किये मातृत्व अवकाश लिया जा सकता है? अगर हां तो किस नियम के तहत
ReplyDeleteजी, प्रथम दृष्ट्या इसमें कोई तकनीकी समस्या नहीं है।
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