नहीं होने पर भी आयकर रिटर्न भरना
कैसे
हो सकता है फायदेमंद ? आइये समझें ।
आयकर रिटर्न भरने और इनकम टैक्स जमा करने में फर्क है । इनकम टैक्स
रिटर्न भरने का मतलब – सरकार को अपनी आमदनी - निवेश और खर्च की जानकारी देना है ।
आयकर रिटर्न भरने के बाद
अगर आप पर टैक्स देनदारी बनती है तो आपको कर चुकाना पड़ता है । अन्यथा परिषदीय
शिक्षकों की अग्रिम आयकर कटौती आयकर रिटर्न भरते समय शिक्षक द्वारा दिये गए खाते में
आयकर विभाग द्वारा रिफ़ंड कर दी जाती है ।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि
किसके लिए इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) फाइल करना जरूरी होता है? अगर आप इस बात को लेकर
कन्फ्यूज हैं कि आप इनकम टैक्स रिटर्न भरें या नहीं ? तो पूरा
आर्टिकल ध्यान से पढ़ें । यदि आप शिक्षक हैं तो अब तक संबन्धित जनपद के वित्त एवं लेखा कार्यालय(बेसिक शिक्षा) नें आप को फॉर्म-16 जारी कर दिया होगा ।
आयकर रिटर्न भरना क्यों जरूरी है?
यदि आप भारत के नागरिक हैं
और आपकी किसी एक वित्त वर्ष में कुल सालाना आय 250000 रुपये से ज्यादा है तो आपके
लिए इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) भरना जरूरी है, चाहे कर की देनदारी हो या नहीं अर्थात पेएबल टैक्स शून्य ही
क्यों न हो ।
नोट –
- किसी एक वित्त वर्ष में अगर आपकी कुल आय सिर्फ कृषि और उससे जुड़े कार्य से होती है तो आपको आईटीआर भरने की जरूरत नहीं है ।
- इसके साथ ही यदि आपकी कुल सालाना आय 2.5 लाख रुपये से कम है तब भी आपके लिए आईटीआर भरना जरूरी नहीं है ।
लेकिन यदि आप नव नियुक्त
शिक्षक हैं और फर्स्ट सैलरी देर से लगने के कारण किसी वित्तीय वर्ष में आपकी कुल
सालाना आय 2.5 लाख रुपये से कम है, तब भी आप
आईटीआर फाइल कर सकते हैं । इस स्थिति में वास्तव में आप
सरकार को कोई टैक्स तो नहीं चुकाते, लेकिन अपनी
आमदनी का एक ठोस सबूत जमा करते हैं । जिसका लाभ शिक्षक को उस वित्तीय वर्ष में प्राप्त
होता है जब उसके एरिअर (बकाया) का भुगतान किया जाता है ।
आयकर रिटर्न भरने से क्या हैं लाभ ?
- यदि
आपकी कुल सालाना आय निर्धारित सीमा से कम है तब भी निल (जीरो) रिटर्न भर देना
चाहिए, इससे आयकर विभाग की नजर में आपका रिकॉर्ड बेहतर रहता है ।
- दोपहिया, कार या होम लोन लेने के वक्त भी इसकी जरूरत होती है । आपका आईटीआर फॉर्म
/ फॉर्म – 16 वास्तव में यह बताता है कि आपकी आय पिछले सालों में कितनी रही है और
कर्ज चुकाने के मामले में आपकी क्या स्थिति है ।
- यदि तकनीकी कारणों से या विभागीय लापरवाही से टैक्स अधिक कट गया है और उसका रिफंड चाहिए तो आईटीआर जरूर फाइल करना चाहिए ऐसा कुछ परिस्थितियों में होता है जैसे कि आपकी आय टैक्सेबल न होने के बावजूद अग्रिम टैक्स काट लिया गया हो ।
- यदि
आपकी आय टैक्सेबल न होने के बावजूद बैंक एफडी पर टैक्स / TDS काट लिया गया है और उसका रिफंड चाहिए तो आईटीआर जरूर फाइल करना चाहिए ।
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